गुरुद्वारे में प्रवेश पर रोक का फैसला निंदनीय

लाहौर। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने मुस्लिम धार्मिक समारोह के दिन सिखों के गुरुद्वारे में प्रवेश पर रोक लगाने के अधिकारियों के फैसले को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उल्लेखनीय है कि बीते सोमवार को मुस्लिम त्योहार शब-ए-बारात के दिन यहां सिखों को उनके धार्मिक समारोह के लिए गुरुद्वारे में प्रवेश नहीं करने दिया गया था।

आयोग ने अपने बयान में कहा है कि अगर कोई चरमपंथी संगठन ऐसा करे तो कोई नई बात नहीं है, लेकिन इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड का सिखों को शब-ए-बारात के दिन लाहौर के गुरुद्वारा शहीद भाई तारू सिंह में नहीं जाने देने का फैसला निंदनीय है।

बोर्ड ने 18 जुलाई को सिखों को गुरुद्वारे में नहीं जाने दिया था, ताकि मुस्लिमों और सिखों के बीच टकराव की आशंका को टाला जा सके। एक मुस्लिम गुट दावत-ए-इस्लामी ने दावा किया था कि गुरुद्वारा जिस स्थान पर है, वहां 15वीं शताब्दी में एक मुस्लिम संत को दफन किया गया था।

बोर्ड के प्रवक्ता आमिर हाशमी ने कहा कि हम कोई टकराव नहीं चाहते थे और इसलिए हमने सिखों से कहा कि वे अपना धार्मिक समारोह 18 की जगह 19 जुलाई को मना लें। सिख समुदाय ने हमारी बात मान भी ली थी।

मानवाधिकार आयोग ने कहा कि बोर्ड को कोई अधिकार नहीं है कि वह एक समुदाय के लोगों को उनके धार्मिक समारोह का दिन आगे बढ़ाने को कहे या एक समुदाय की धार्मिक मान्यताओं के आगे दूसरे समुदाय की मान्यताओं को प्राथमिकता दे।

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